लोकतंत्र में भीड़तंत्र:

1970 का दशक: एक मामूली कुर्सी पर बैठा, विजय वर्मा अपने होठों के बीच सिगरेट लहराए, गुंडों को घूर रहा है.
वो अपने माता-पिता के ख़िलाफ हुए अन्याय का बदला लेने पूरे समाज से लड़ने के लिए मुंबई की तस्करी की दुनिया का बेताज बादशाह बन जाता है. उसका हर शब्द, उसका हर एक्शन उसकी दुनिया का क़ानून होता है.
फिल्म ‘दीवार’ का ‘एंग्री यंग मैन’ अमिताभ बच्चन यानी विजय वर्मा हक़ीक़त की दुनिया के क़ानून का पालन नहीं करता. किसी ने उस विजय वर्मा को विजिलांटे वर्मा यानी क़ानून को अपने हाथ में लेने वाला वर्मा कहा था.
2015-17 का दौर: जम्मू में एक मवेशी व्यापारी परिवार को औरतों और बच्चों समेत बुरी तरह से मारा-पीटा जाता है.

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