मेघालय: माहौल में ज़ायकेदार खाने की महक है और सभी का ध्यान प्लेट पर ही है.

नोंगफू शहर में 8 जून को मोदी सरकार की उपलब्धियां बताने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन इंडियन ऑयल और एनटीपीसी जैसी सरकारी कंपनियों ने किया था.

लेकिन इस कार्यक्रम में राज्य के शीर्ष भाजपा का नेतृत्व मंच से भाषण दे रहा था.

ठीक इसी समय यहाँ से करीब 300 किलोमीटर दूर तूरा इलाके में बाचू मरक जैसे भाजपा के कुछ नेता पार्टी की ‘बीफ़ नीति’ से नाराज़ हो इस्तीफ़ा दे रहे थे.

बाचू मारक ने इस्तीफे के समय कहा था, “मैं स्थानीय लोगों की भावनाओं से समझौता नहीं कर सकता. गोमांस खाना हमारी संस्कृति का हिस्सा है. भाजपा की ओर से हम पर ग़ैर-धर्मनिरपेक्ष विचारधारा थोपा जाना ठीक नहीं”.

राजधानी शिलांग के बड़ा बाजार इलाके में राज्य की सबसे बड़ी बीफ़ मार्किट है जहाँ दोपहर बाद पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती.

बाजार से थोड़ी दूर एक रेस्टोरेंट में दर्जनों लोग खाना खा रहे हैं.

मालिक डब्लू लिंगदोह ने कहा, “मैं क्या खाऊँगा ये आप मुझे नहीं बताएंगे. बीफ़ खाने से रोकने की बात कीजिएगा तो लोग आपकी जान तक ले सकते हैं”.

पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों की ही तरह मेघालय में गोमांस खाना वैध है और काफ़ी लोकप्रिय भी.

ये एक ऐसा राज्य भी है जहाँ भारतीय जनता पार्टी की कोई ख़ास पहचान नहीं रही है.

इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मेघालय में अपनी राजनीतिक पहचान बना कर आगामी विधान सभा चुनावों पर निशाना साध रखा है.

बीच में आ रही है बीफ़ और पशु वध जैसे संवेदनशील मामलों पर पार्टी की आम नीति जो गोमांस खाने वालों को बिलकुल विपरीत लगती है.

सफ़ाई

साल 2015 में जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मेघालय का अपना पहला दौरा किया था तो एक संगठन ने इसके विरोध में बीफ़ पार्टी का आयोजन किया था.

पार्टी तभी से लेकर बीफ़ पर अपनी नीतियों पर सफ़ाई देती रही है.

गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश के पार्टी के प्रभारी नलिन कोहली इस बात को दोहरा चुके हैं कि ‘किसी के खाने पर कोई रोक नहीं लगेगी’.

लेकिन इसके बावजूद भाजपा का बीफ़-बैन को अप्रत्यक्ष समर्थन, पशु-वध के ख़िलाफ़ लाया गया नया लेकिन विवादित क़ानून और गोरक्षा नीति पर सोशल मीडिया में ख़ासा बवाल मचा रहा है.

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