मध्य प्रदेश: एक जून से फ़सलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने को लेकर आंदोलन कर रहे किसान;

कर्ज़ माफ़ी किसानों की समस्या का कोई स्थाई हल नहीं: गौरीशंकर बिसेन

मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन थमता नज़र आ रहा है.

एक जून से फ़सलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने को लेकर आंदोलन कर रहे मध्य प्रदेश के किसानों का आंदोलन मंदसौर में छह जून को हिंसक हो गया जिसमें पुलिस की गोलियों से छह लोगों की मौत हो गई.

 

किसान फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने के अलावा कर्ज़ माफ़ी और स्वामीनाथन कमेटी की सिफ़ारिशें लागू करने की मांग भी कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने हिंसा फैलाने के लिए कांग्रेस और अराजक तत्वों पर आरोप लगाया और ख़ुद शांति बहाली के लिए उपवास पर भी बैठे थे.

कर्ज़ नहीं ब्याज में राहत

फ़िलहाल उन्होंने मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवज़े और मामले की जांच की घोषणा की है, वहीं महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने लाखों किसानों के कर्ज़ माफ़ करने की घोषणा की है.

लेकिन मध्य प्रदेश में किसानों के कर्ज़ माफ़ नहीं हुए हैं.

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने बीबीसी से बातचीत में कहा,”2003 से मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. जब अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, उनकी सरकार ने 1999 में किसानों के लिए ब्याज दर सात फ़ीसदी कर दी थी, 2008 तक मध्य प्रदेश और पूरे देश में ये ब्याज दरें किसानों के कर्ज़ पर लागू रहीं.”

उनके मुताबिक, “मध्यप्रदेश सरकार ने 2003 से 2008 तक में किसान ऋण पर ब्याज दर को घटाकर तीन फ़ीसदी कर दिया. बाद में अपने घोषणा पत्र के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने 2008-2009 में किसानों को दिए जाने वाली कर्ज़ में ब्याज को तीन फ़ीसदी और 2009 -10 में एक फ़ीसदी कर दिया. उसके बाद तीन साल से शून्य प्रतिशत ब्याज दर कर दिया.”

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