ब्रेकिंग गोरखपुर:- थाना चौरी चौरा क्षेत्र में किसके संरक्षण में धधक रही अबैध शराब की भट्ठियां?

:-गोरखपुर।थाना चौरी चौरा में कुछ माह से थानेदार की कुर्सी पर श्री रामअशीष यादव जी बतौर बिराजमान है जिनके कुशल नेतृत्व की चर्चा अगर आप सुनेगे तो दंग रह जायेंगे इस थाने अंदर पीड़ित को न्याय नहीं मिलता पीड़ितों के साथ जो वर्ताव थाने के अंदर होता है जिसे सुनकर आपका कलेजा दहल जायेगा जमीन का स्वामी जिसके नाम से खतौनी इंटखाफ में नाम दर्ज है उसके ऊपर फर्जी मुकदमे दर्ज कर उसकी जमीन पर क्षेत्र के दलालों के हाथों बेचने की जुगत में खुद पुलिस लग गए है ।
अवैध शराब के कारोबार से राजस्व का लाखों का नुकसान भले होता हो ,इससे बाद भी स्थानीय पुलिस कुछ भी नहीं कर सकती।
भौवापार ,कुसुली,जयपुर,और ढोलहा में काफी मात्रा में अबैध शराब का निर्माण व बिक्री शक्षम लोग करते है और मजदुरी करने वाले लोग शाम के वक्त अधिक पीते है।
इस कच्ची शराब के सेवन से गांव के आधे दर्जन से अधिक लोग असमय ही काल के गाल में समा चुके है।
पिछले वर्ष 2015 में इन धंधे बाजों के बिरुद्ध जिला आबकारी अधिकारी की टीम हरकत में आया बिभाग ने एक अभियान चलाकर अबैध शराब निर्माताओं को पकड़वाने का प्रयास किया किन्तु कोई कारोबारी पकड़ में नहीं आया। सिर्फ लहन नस्ट हुआ और शराब बरामद हुआ। उसके बाद से किसीअधिकारी ने इन धंधे बाजों को टच तक नहीं किया।
थाना चौरी चौरा क्षेत्र के आधे दर्जन ऐसे गांव है जहाँ सक्षम लोग दारू बनाने और बेचने का काम करते है। इस जोन का सबसे चर्चित और बदनाम गांव ढोलहा है जहाँ किसी भी समय शराबी शराब पीकर मारपीट गाली गल्लोज़  करते देखे जाते है सबसे ज्यादा परेशान इस गांव के अंदर निवास करने वाली  महिलाये, बुजुर्ग और  बच्चे  है ।इस जोन का अबैढ शराब बनाने  का सबसे मुफीद धंधा है। सबसे अहम बात यह है की यहाँ किसी भी कार्यवाही के वक्त महिलाये आगे आ आकर खड़ी हो जाती है।
उक्त बातें शिवशक्ति सेवा समिति की अध्यक्ष श्रीमती चन्द्रकला साहनी ने कहा की इस गांव का अबैध शराब का कारोबार बन्द नहीं हुआ तो इस गांव में बिधवावों की संख्या  और बढ़ेगी।
इस बाल बुजुर्ग गांव में निवास करने वाले पिछड़ी जाति के लोगों का जो हैअस्तित्व  वह खतरे में है यहाँ मारपीट की घटनाये शराब की देन से है।
भगवान ही मालिक है
सबसे अधिक शराब का सेवन कमजोर और मध्यम वर्ग का मजदूर लोग ही पीते है। उदाहरण के लिए गांव का नया शॉन शौकीन वाले युवा वर्ग सिगरेट और जहरीली शराब का सेवन करके अपने गांव मुहल्ले वालों से लड़ते झगड़ते अक्सर देखे जाते है। उलझनों की झेल और तबाही से तंग लोग इन शराबियों के शिकार होते है। गांव के गली और अँधेरे में रात -रात भर घूमने वाले शराब पीकर गांव में किसी को गाली देने से गुरेज भी नहीं करते ।आज इनकी आवाज़ पुलिस को सुनाई नहीं देती इन शराबियों की संख्या निरन्तर वढती ही जा रही है।
इसको लेकर पुलिस को एक महाअभियान चलाना चाहिए ताकि   मुखभीर की सुचना पर पुलिस को कार्यवाही अवश्य करना चाहि।

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