दक्षिण कश्मीर: धवार रात लश्कर-ए-तैयबा के तीन चरमपंथी सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए हैं.

इसके अलावा दक्षिणी कश्मीर के ज़िला पुलवामा के काकापोरा में बुधवार रात लश्कर-ए-तैयबा के तीन चरमपंथी सुरक्षा बलों के साथ एक मुठभेड़ में मारे गए हैं.

मुठभेड़ में चरमपंथियों की मौत के बाद इलाक़े में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है. सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुई हैं.

सुरक्षाबलों की ओर से चलाए गए पेलेट गन में 22 वर्षीय युवा तौसीफ़ अहमद वाणी घायल हुआ था जिसने बाद में दम तोड़ दिया.

काकापोरा, अवंतीपोरा के अलावा पुलवामा में भी कई जगह झड़पों की ख़बरें हैं. इन प्रदर्शनों में कई लोग घायल बताए जा रहे हैं.

वहीं मारे गए चरमपंथियों के अंतिम संस्कार में भी बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए हैं. तीनों चरमपंथी स्थानीय निवासी थे और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे.

इनकी पहचान माजिद, शारिक़ और शिराज़ अहमद के रूप में हुई है.

चरमपंथियों के जनाज़े में शामिल लोगों ने कश्मीर की आज़ादी के नारे भी लगाए.

अवंतीपोरा और काकापोरा में झड़पों और प्रदर्शनों की वजह से श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा.

अनंतनाग से श्रीनगर जा रहे एक यात्री ने बीबीसी को बताया, “हमें काफी देर तक अवंतीपोरा के नज़दीक गाड़ी में रुकना पड़ा, वहां लोगों और सुरक्षा बलों के बीच प्रदर्शन और झड़पें हो रही हैं. बहुत देर तक इंतज़ार करने के बाद हमें वापस अनंतनाग लौटना पड़ा. सैकड़ों गाड़ियों को हाइवे पर ही रोक दिया गया है.”

तनाव के मद्देनज़र प्रशासन ने लोगों के आवागमन पर रोक लगा दी है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं. श्रीनगर-अनंतनाग और श्रीनगर-बारामूला रेल सेवा को भी बंद कर दिया गया है.

दक्षिणी कश्मीर चरमपंथ का गढ़ बना हुआ है. मारे गए हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी भी इसी इलाक़े के थे और उनकी मौत के बाद यहां लंबे समय तक प्रदर्शन होते रहे.

बुधवार को भी उत्तरी कश्मीर के सोपोर में हिज़बुल मुजाहिदीन के दो चरमपंथी मुठभेड़ में मारे गए थे.

भारत प्रशासित कश्मीर में बीते महीनों में चरमपंथी वारदातों में बढ़ोत्तरी हुई है. सुरक्षाबलों के अभियान भी तेज़ हुए हैं.

बीते एक महीने में कई बड़े चरमपंथी कमांडर सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए हैं. बीते चार महीनों में चरमपंथी हमलों में 16 पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं.

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