कुशीनगर से लगभग १७ किलोमीटर दूर

कुशीनगर से लगभग १७ किलोमीटर दूर  प्राचीन सूर्य – मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि यहाँ काफी समय पहले भगावन सूर्य की नीलमणि पत्थरों से बनी मूर्तियां स्वतः ही पृथ्वी के अंदर से प्रकट हुई थीं तत्पश्चात यहाँ भगवान सूर्य के मंदिर का निर्माण कराया गया।  बताया  जाता है की  यह मंदिर गुप्तवंश के शाशन काल  में बनाया गया था तथा सूर्य मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण में भी देखने को भी मिलता है।

इस मंदिर के विसय में लोगो के अलग अलग मत है कुछ लोग इस मंदिर का रहस्य यहाँ के राजा महाराजाओ से जोड़ते है तथा इसका सम्बन्ध महाभारत काल से जोड़ते है।

परंतु बास्त्वि जानकारी तथा पूर्ण सत्य जानकारी किसी को भी नहीं पता है लेकिन यह बात तो पूर्णतः सत्य है की इस मंदिर पर भगवान सूर्य की अपार अनुकंपा रहती है।

मकरसंक्रांति तथा  पूर्णिमा के दिन यहाँ  भक्तो  का ताँता लगा रहता है। इस दिन भगवान् सूर्य के दर्शन कर भक्त अपने जीवन के सभी ग्रहो व् कस्तों से मुक्ति प्राप्त करते  है।

 

आकाश मिश्रा

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