कश्मीर: डर की लहर ने पूरे कश्मीर को अपनी चपेट में लिया है.

हालांकि इन चरमपंथी हमलों का केंद्र दक्षिणी कश्मीर ही ज़्यादा रहा है लेकिन डर की लहर ने पूरे कश्मीर को अपनी चपेट में लिया है.

शुक्रवार को दक्षिणी कश्मीर में एक चरमपंथ हमले में एक अधिकारी समेत पुलिस के छह जवान मारे गए.

इसी रोज एक अन्य एनकाउंटर में दो आम नागरिकों के अलावा तीन चरमपंथियों की मौत हुई.

इससे पहले गुरुवार को दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम ज़िले में एक पुलिस जवान को उसके घर के बाहर ही मार दिया गया था.

इसके कुछ ही घंटों के बाद राजधानी श्रीनगर में एक दूसरे चरमपंथी हमले में एक और पुलिस जवान की मौत हो गई थी जबकि एक अन्य घायल हो गया था.

इन हमलों के तीन दिन पहले कश्मीर घाटी में कई जगहों पर एक साथ हुए छह चरमपंथी हमलों में पुलिस और सुरक्षा बलों के करीब 13 जवान घायल हो गए थे.

इन छह हमलों में से पांच दक्षिण कश्मीर में ही हुए थे. कश्मीर में हालात का इस तरह अचानक अशांत होना कोई नई बात नहीं है.

लेकिन चरमपंथी हमलों में आई इस तेज़ी को जानकार चिंताजनक बता रहे हैं. शुक्रवार को कुलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जुनैद मट्टो एनकाउंटर में मारे गए थे.

शनिवार को उनके जनाजे में भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि जनाजे की नमाज़ सात बार पढ़ी गई. ऐसा नहीं है कि सिर्फ जुनैद के जनाज़े में इतनी भीड़ देखी गई हो.

बल्कि हाल ही में मारे गए हिज़बुल मुजाहिदीन के कमांडर सबज़ार भट और बीते साल बुरहान वानी के जनाजे में भी भारी भीड़ जुटी थी.

दूसरी चिंताजनक बात आम लोगों का एनकाउंटर वाली जगहों तक पहुंचना है.

बीते दो महीनों में एनकाउंटर वाली जगहों पर एक दर्जन से भी ज़्यादा आम नागरिक सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे जा चुके हैं.

हालांकि पुलिस और सेना के अधिकारीयों ने कई बार एनकाउंटर साइट्स से आम लोगों को दूर रहने के लिए कहा है.

लेकिन आम तौर पर लोग सेना के इन आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं.

शनिवार को एक बार फिर कश्मीर ज़ोन के कमिश्नर ने आम लोगों से मुठभेड़ स्थलों के नज़दीक न जाने की अपील की है.

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हालत बिगड़ रहे हैं लेकिन सबसे चिंताजनक स्थिति दक्षिण कश्मीर की है जहां लगातार चरमपंथी हमले हो रहे हैं.

एक महीने पहले जम्मू और कश्मीर पुलिस के चीफ एसपी वैद्य ने दक्षिण कश्मीर में रहने वाले अधिकारियों और जवानों से अपने घर न जाने को कहा था.

कई जगहों पर पुलिस अधिकारियों के घरों में चरमपंथियों के दाखिल होने के बाद पुलिस प्रमुख को ये आदेश देना पड़ा था.

दक्षिणी कश्मीर को इस समय चरमपंथ का गढ़ समझा जाता है. बीते दो सालों में जितने भी वीडियो चरमपंथियों ने जारी किए हैं वो सब दक्षिणी कश्मीर के ही हैं.

इसी बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर कहा है कि कश्मीर में सिर्फ बातचीत के जरिए ही ख़ूनख़राबा रोका जा सकता है.

दक्षिणी कश्मीर के एक शहरी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से कहा, “जिस तरह से चरमपंथी हमले हो रहे हैं, उससे लोग सहम गए हैं. मैं जिससे भी बात करता हूं वो इन हालात के कारण मानसिक तनाव में दिखाई देता है.”

कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक परवेज मजीद कहते हैं, “इस में कोई शक़ नहीं है कि कश्मीर के मौजूदा हालात और गंभीर होते जा रहे हैं. बीते दो महीनों में कश्मीर के अलग-अलग इलाक़ों में बिगड़ रहे हालात से आम लोग ख़ौफ़ में हैं.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *